12/09/2026 11:13 am
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अंतरराष्ट्रीय युवा कांक्लेव 2026 का आयोजन

इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में भारतीय वर्ल्ड अफेयर्स परिषद के सहयोग से यह आयोजन किया गया।

नई दिल्ली (बृजेश भट्ट)। इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में भारतीय वर्ल्ड अफेयर्स परिषद के सहयोग से ‘अंतरराष्ट्रीय युवा कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “परिवर्तित विश्व व्यवस्था में भारतीय विदेश नीति: सुरक्षा, विकास और वैश्विक नेतृत्व के बीच संतुलन” रखा गया है। इस आयोजन में देशभर के विद्वानों, नीति विशेषज्ञों और स्नातक छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अहम मुद्दों पर चर्चा की। यह पहल समसामयिक वैश्विक गतिविधियों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देने और छात्रों में वैश्विक व्यवस्था की समझ को गहरा करने हेतु इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। यह कॉन्क्लेव आईसीडब्ल्यूए के साथ हुए एक एमओयू के तहत आयोजित की गयी, जिसका उद्देश्य युवाओं में विदेश नीति के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, उद्घाटन सत्र में “वसुधैव कुटुंबकम” (विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत को भारतीय विदेश नीति का आधार स्तंभ बताया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय सहस्रबुद्धे (पूर्व उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी) रहे। उनके साथ आईसीडब्ल्यूए की रिसर्च फेलो सुश्री हिमानी पंत भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का नेतृत्व महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. पूनम कुमारिया ने किया।
प्रो. पूनम कुमारिया ने शिक्षा और नीति संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “इस कॉन्क्लेव का प्राथमिक उद्देश्य युवा महिलाओं को सशक्त बनाना और उनमें तार्किक सोच विकसित करना है ताकि वे वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभा सकें।”
डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की वैश्विक साख उसके सैद्धांतिक नेतृत्व की देन है। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज द्वारा भारत की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत करने में दिए गए योगदान को भी याद किया। चर्चा के दौरान यह भी उभर कर आया कि वैश्वीकरण के दौर में युवाओं के लिए भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं और मानवीय संकल्पों को समझना अनिवार्य है। कॉन्क्लेव के दौरान विशिष्ट अतिथियों ने महाविद्यालय के संग्रहालय और अभिलेखागार का भी अवलोकन किया, जहाँ उन्होंने संस्थान की ऐतिहासिक विरासत और संग्रह की सराहना की। यह आयोजन आईसीडब्ल्यूए के ‘विदेश नीति जागरूकता अनुदान’ के सहयोग से सफल हुआ है। यह कार्यक्रम उन जागरूक और प्रखर युवतियों को तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय विमर्श में योगदान दे सकें।

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