12/09/2026 11:12 am
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कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस की बीट प्रणाली से जासूसी गिरोह का पर्दाफाश कौशांबी में पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा खतरा।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित कौशांबी से जासूसी के एक ऐसे सनसनीखेज मामले का खुलासा।

गाजियाबाद  :कमिश्नरेट गाजियाबाद ने पुलिस की बीट प्रणाली एक बार फिर कारगर साबित हुई है। थाना कौशांबी क्षेत्र में पुलिस की सतर्कता और मजबूत सूचना तंत्र के चलते एक संभावित गंभीर सुरक्षा खतरे का समय रहते खुलासा किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो संवेदनशील स्थानों की वीडियो और फोटो बनाकर विदेशों में भेज रहे थे।

थाना कौशांबी के बीट आरक्षी विनेश चौधरी को सूचना मिली।

जानकारी के अनुसार, 14 मार्च को बीट आरक्षी विनेश चौधरी को नियमित गश्त के दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग रेलवे स्टेशन और कैंटोनमेंट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर कैमरे लगाकर वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। इसके बदले उन्हें UPI के माध्यम से पैसे मिल रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए दबिश दी और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में आरोपियों के मोबाइल से विदेशी नंबरों पर व्हाट्सएप चैट और संवेदनशील स्थानों की फोटो-वीडियो साझा करने के साक्ष्य मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों को भी सूचना दे दी ग

पाकिस्तानी हैंडलर के सीधे संपर्क में थे आरोपी।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी पाकिस्तान में बैठे एक शख्स, जिसका नाम सरदार उर्फ सरफराज उर्फ जोगा सिंह बताया जा रहा है, के सीधे संपर्क में थे। ये सभी ‘संदेश ऐप’ (Sandes App) के जरिए लगातार पाकिस्तान से निर्देश ले रहे थे।  नेटवर्क का जाल मेरठ, गाजियाबाद से लेकर बिहार के पूर्णिया और मुजफ्फरपुर तक फैला हुआ था।

रील्स’ बनाने के बहाने सैन्य ठिकानों की रेकी
पकड़े गए नाबालिग आरोपियों का इस्तेमाल बेहद शातिराना तरीके से किया जा रहा था। ये लड़के सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो या रील्स बनाने का बहाना बनाकर प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों और महत्वपूर्ण ठिकानों के पास जाते थे। वहां की फोटो और वीडियो खींचकर वे अलग-अलग लोकेशन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए पाकिस्तान भेज देते थे। इन वीडियो में सेना की मूवमेंट और बेस की संवेदनशील जानकारी शामिल होती थी।

जासूसी की ‘दिहाड़ी’: जन सेवा केंद्रों से लेते थे नकद पैसे
देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के बदले इन आरोपियों को बहुत मामूली रकम दी जाती थी। खुलासे के मुताबिक, हर सूचना या वीडियो के बदले इन्हें 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का भुगतान किया जाता था। पहचान छिपाने के लिए ये लोग सीधे बैंक अकाउंट में पैसे नहीं लेते थे, बल्कि जन सेवा केंद्रों (Jan Seva Kendras) पर इंटरनेट के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफर करवाते थे और वहां से नकद रुपये प्राप्त करते थे।

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, बीट प्रणाली के लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण और निगरानी में काफी सुधार हुआ है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या डायल 112 पर दें।

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