भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग और संकटों से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक का हथियार की तरह इस्तेमाल सभी देशों की साझा प्रगति में बाधा बन सकता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ विषय पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल सभी देशों और वर्गों को साथ लेकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियार की तरह इस्तेमाल हमारी साझा प्रगति में बाधा डाल सकता है। इसलिए हमने तकनीक को सभी के लिए सुलभ बनाने पर जोर दिया है।”
चार प्रमुख स्तंभों पर किया काम
पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के कामकाज को चार प्रमुख स्तंभों- लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि सभी देशों के सहयोग से साझा सोच को ऐसे सहयोग में बदलने में सफलता मिली है, जिसका लाभ सभी को मिल सके।
दुनिया में बढ़ते तनाव का आम लोगों पर असर
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका आम लोगों के जीवन पर व्यापक असर पड़ रहा है। महामारी, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों ने दिखाया है कि आज की एक-दूसरे से जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
संकटों से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच संकटों से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। चुनौतियों की समय रहते पहचान करना, उनके लिए तैयारी करना और तुरंत कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स के साझा प्रारंभिक चेतावनी तंत्र पर सहमति बनी है। आपदा प्रबंधन के लिए भी प्रारंभिक चेतावनी से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने के दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, ब्रिक्स की लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग व्यवस्था से आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक भरोसेमंद और संकटों के प्रति मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
स्टार्टअप और किसानों के लिए नई पहल
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क के जरिए सदस्य देशों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर आपस में जुड़ेंगे। नए और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव रखा गया है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स डिजिटल कृषि नेटवर्क किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। इसके जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाएगा।
आम लोगों और छोटे कारोबारियों की भागीदारी पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को भी इसमें सक्रिय भागीदार बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स कनेक्ट के जरिए कौशल विकास, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में काम किया गया है।
छोटे कारोबारियों को जानकारी, वित्तीय सहायता और नए बाजारों से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल शुरू किया गया है। वहीं, शहरों के बीच बेहतर तौर-तरीके साझा करने के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब की स्थापना की गई है।
स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण पर भी ध्यान
प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यही स्थिरता की बुनियाद है और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी। उन्होंने बताया कि स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। इससे स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद, प्रभावी और सभी के लिए सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, कृषि-पारिस्थितिकी और पुनर्योजी कृषि के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना है। समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन के लिए तैयार किए गए सिद्धांतों से जलवायु संबंधी कदमों में स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान को अहम आधार बनाने में मदद मिलेगी।