ब्रिक्स देशों ने फिलिस्तीन के कब्जे वाले क्षेत्रों, खासकर गाजा की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। नई दिल्ली घोषणा 2026 में सभी पक्षों से गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट के पहुंचाने की अपील की गई है।
घोषणा में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद गाजा में हिंसा जारी रहना चिंता की बात है। ब्रिक्स देशों ने फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की किसी भी कोशिश को रोकने की मांग की है। उन्होंने ऐसी व्यवस्थाओं पर भी चिंता जताई है, जिनसे फिलिस्तीनियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं या कब्जे को बढ़ावा मिल सकता है।
ब्रिक्स देशों ने संयुक्त तौर पर साफ कहा कि गाजा या कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों से लोगों को अस्थायी या स्थायी रूप से किसी भी बहाने से विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, गाजा के भूगोल या जनसांख्यिकी में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध किया गया है।
दो राष्ट्र समाधान का समर्थन
घोषणा में कहा गया है कि इजराइल-फिलिस्तीन विवाद का न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही संभव है। इसके लिए फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय और अपने घर लौटने के अधिकार सहित उनके वैध अधिकारों को पूरा करना जरूरी है।
ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता के समर्थन को दोहराया है। साथ ही, दो राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत 1967 की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र बनाने की बात कही गई है। इस राष्ट्र की राजधानी पूर्वी यरुशलम हो और इजराइल एवं फिलिस्तीन दोनों देश शांति और सुरक्षा के साथ एक-दूसरे के साथ रहें। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय संगठनों, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों और उनकी सुविधाओं में फिलिस्तीन को उचित प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
गाजा में आम लोगों और अस्पतालों की सुरक्षा पर जोर
ब्रिक्स देशों ने गाजा में मानवीय स्थिति पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून का पालन करने की अपील की है। घोषणा में युद्ध के हथियार के रूप में लोगों को भूखा रखने, आम नागरिकों और नागरिक ढांचे पर हमले करने तथा अस्पतालों और दूसरी जरूरी सेवाओं को निशाना बनाने की निंदा की गई है।
मानवीय सहायता पहुंचाने में जानबूझकर रुकावट डालने और राहत कार्यों को राजनीतिक या सैन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की कोशिशों का भी विरोध किया गया है। ब्रिक्स ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी यानी यूएनआरडब्ल्यूए के काम का समर्थन दोहराया है। घोषणा में कहा गया है कि एजेंसी को फिलिस्तीनी शरणार्थियों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
यरुशलम की स्थिति बदलने की एकतरफा कोशिशों का विरोध
ब्रिक्स देशों ने कब्जे वाले यरुशलम की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति बदलने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई को खारिज किया है। उन्होंने शहर के सभी धार्मिक स्थलों और पवित्र स्थानों की पवित्रता बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, सभी लोगों को धार्मिक स्थलों तक पहुंचने और अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिए जाने पर जोर दिया गया है। घोषणा में सभी संबंधित पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने, संयम बरतने और तनाव बढ़ाने वाले कदमों या भड़काऊ बयानों से बचने की अपील की गई है।