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यज्ञ की वैज्ञानिकता एवं समकालीन उपयोगिता विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

उज्जैन। आज दिनांक ०२-०५-२०२६ को वैदिक विज्ञान केन्‍द्र, का.हि.वि.वि. एवं महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) के संयुक्‍त तत्‍त्‍वावधान में “यज्ञ की वैज्ञानिकता एवं समकालिक उपयोगिता” विषयक विशिष्‍ट व्‍याख्‍यान का आयोजन किया गया। व्‍याख्‍यान के वक्‍ता डॉ. सुश्रुत एस., अन्ताराष्ट्रिय आध्यात्मिक अध्ययन केन्‍द्र, अमृत विश्वविद्यालय, कोयम्‍बतूर ने ”सोमयाग” की महत्‍ता के विषय में विस्‍तार से अपने विचार रखे तथा व्‍याख्‍यान के मुख्‍य वक्‍ता प्रो. प्रो. रामचन्‍द्र भट्ट, निर्देशक, वराहमिहिर वेद विज्ञान, अनुसन्‍धान केन्‍द्र एवं व्‍यास योग विश्वविद्यालय, बैंगलूरु ने अपने वक्‍तव्‍य में कहा कि यह भारत का अमृतकाल चल रहा है। इसमें विज्ञान को वेद के द्वारा अनुप्रमाणित करना है।कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कर रहे वैदिक विज्ञान केन्‍द्र के समन्‍वयक प्रो. विनय कुमार पाण्‍डेय ने कहा कि काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय भारत ही नहीं विश्‍व के अधिकतम विश्‍वविद्यालयों में से एकमात्र ऐसा विश्‍वविद्यालय है, जहॉं प्राचीन ज्ञान एवं आधुनिक विषय का एक साथ अध्‍ययन अध्‍यापन कार्य किया जाता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. धीरज कुमार मिश्र, महिला महाविद्यालय, काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय तथा धन्‍यवाद ज्ञापन श्री जयन्‍तपति त्रिपाठी, नारायणानन्‍द तीर्थ, वेदविद्यालय, वाराणसी ने किया।

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