ब्रिक्स देशों के बीच नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की संयुक्त घोषणा पर सहमति बन गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि, शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक चली लंबी बातचीत और गहन विचार-विमर्श के बाद सदस्य देश घोषणा के मसौदे पर सहमत हुए। बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर मतभेद सामने आए, लेकिन भारत की अगुवाई में लगातार हुई चर्चा के बाद सभी देशों के बीच सहमति कायम हो सकी।
इस घटनाक्रम को वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। ब्रिक्स में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल हैं, जिनके पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर विचार काफी अलग हैं। ऐसे में इस बात पर खास नजर थी कि इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत सभी देशों को संयुक्त घोषणा पर एकमत कर पाएगा या नहीं।
आज शाम जारी हो सकती है जॉइंट स्टेटमेंट
दावा है कि संयुक्त घोषणा शनिवार शाम 5 बजे जारी की जा सकती है। यह नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के बाद होने वाली बंद कमरे की बैठकों के समाप्त होने के कुछ समय बाद जारी होगी। घोषणा में किसी भी देश की ओर से एकतरफा युद्ध संबंधी कार्रवाई की निंदा की जा सकती है। लेकिन, इसमें किसी खास देश का नाम लेने से बचा जा सकता है।
पश्चिम एशिया और यूक्रेन के युद्ध के बीच एकजुटता की कोशिश
ब्रिक्स देशों के नेता ऐसे समय बैठक कर रहे हैं, जब यूक्रेन और पश्चिम एशिया में युद्ध जारी हैं। इसके अलावा अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव भी इस समूह के सामने चुनौती बना हुआ है। अलग-अलग देशों के अपने-अपने रणनीतिक हित हैं, ऐसे में साझा मुद्दों पर सहमति बनाना ब्रिक्स के लिए आसान नहीं है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना भी ब्रिक्स के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। सदस्य देश व्यापार और भुगतान के लिए अपनी-अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाली वित्तीय व्यवस्था के विकल्प तलाशने पर जोर दे रहे हैं। चीन और रूस ब्रिक्स को अमेरिकी वर्चस्व, खासकर पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने और उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के एक मंच के रूप में देखते हैं।
रूस और ईरान का डॉलर पर निर्भरता घटाने पर जोर
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स बिजनेस फोरम में कहा कि यह समूह किसी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस दुनिया के सभी देशों के साथ सहयोग के लिए तैयार है और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए काम करता है।
ईरान भी ऐसी व्यवस्थाएं बनाने पर जोर दे रहा है, जिनसे ब्रिक्स देशों की पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता कम हो सके और उन्हें आर्थिक दबाव से बचाया जा सके। ईरान पर व्यापक प्रतिबंध हैं और वह अमेरिकी दबाव का सामना कर रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ब्रिक्स देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का समर्थन किया है।
रूस, ईरान और पश्चिमी देशों के साथ संतुलन साध रहा भारत
भारत के लिए यह सम्मेलन रूस और ईरान के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखने के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिशों को आगे बढ़ाने का अवसर भी है। भारत लंबे समय से रूस और ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहा है।