प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन को वैश्विक मंच पर अपने काम को ठोस नतीजों में बदलना होगा। अगले 20 वर्षों के लिए ब्रिक्स को एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले काम करने के तरीके में बदलाव लाना होगा। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संगठन के काम में निरंतरता और संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने इसके लिए ‘ब्रिक्स कम्युनिटी कंटीन्यूटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म’ बनाने का प्रस्ताव रखा। इस व्यवस्था के तहत ट्रोयका के माध्यम से ब्रिक्स की सभी पहलों और उनके नतीजों की निगरानी की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जा सकती है, जिसमें हर फैसले के साथ उससे जुड़े नोडल पॉइंट, समय सीमा और उसे लागू करने की स्थिति दर्ज हो। इससे फैसलों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक संस्थाओं में सुधार की दिशा भी तय करनी होगी। उन्होंने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना पिरामिड से की। उनके मुताबिक, इसके ऊपरी हिस्से में ताकत और फैसले लेने की शक्ति केंद्रित है, जबकि निचले हिस्से में वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में उनकी भूमिका सीमित है। वैश्विक सुधार के रोडमैप में तीन बातों पर विशेष ध्यान देना होगा, प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने में भागीदारी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस मुद्दे पर टेक्स्ट-बेस्ड बातचीत को तय समय सीमा और स्पष्ट नतीजों से जोड़ना होगा।
अगली समिट तक 10 सुधार प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव
पीएम मोदी ने कहा कि हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास होना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ब्रिक्स देश मिलकर वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार से जुड़े 10 प्रस्ताव तैयार करें। इसके बाद अगली समिट तक इन्हें ‘ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप’ का रूप देने की कोशिश की जाए। वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, नेतृत्व की भूमिका और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक हकीकत के अनुरूप होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को दिशा देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थानों की कार्यक्षमता पर जोर देते हुए कहा कि लोगों का भरोसा तभी कायम होगा, जब ये संस्थाएं समस्याओं का प्रभावी समाधान कर सकें। सामूहिक प्रतिक्रिया की गति, उसके स्तर और अंतिम व्यक्ति तक उसके असर पर ध्यान देना जरूरी है।
समुद्री यात्रियों के लिए आपात सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री यात्रियों यानी सीफेयरर्स के लिए एक आपात सहायता नेटवर्क बनाने का भी प्रस्ताव रखा। इसमें समुद्री प्राधिकरणों और संबंधित मिशनों को जोड़ा जा सकता है। इसका उद्देश्य संकट के संकेत मिलने पर मदद पहुंचाना, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना, परिवारों को सूचना देना और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद करना होगा।
ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि आज संयुक्त राष्ट्र का दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस है। ग्लोबल साउथ को समर्पित इस दिन ऐसा फैसला विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में नेतृत्व करने के लिए तैयार है। यदि हमारा भविष्य साझा है तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। यही ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने के अवसर पर उसका संकल्प होना चाहिए।
ग्लोबल साउथ की भागीदारी जरूरी
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकें भविष्य के अवसरों के साथ-साथ वैश्विक नियमों को भी आकार दे रही हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी जरूरी है। ब्रिक्स के माध्यम से ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को बातचीत की कला, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे वे वैश्विक नियमों और नीतियों को तय करने की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।