प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर अबूधाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और यूएई के बीच मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक और ऊर्जा संबंधों के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते संपर्क के महत्व पर जोर दिया।
ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर के एल्युमिनियम संयंत्र का निवेश
बैठक में भारत और यूएई के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यूएई की कंपनी इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) की ओर से ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर के एकीकृत एल्युमिनियम संयंत्र की स्थापना में निवेश की घोषणा का स्वागत किया। यह भारत में एल्युमिनियम क्षेत्र का सबसे बड़ा एकीकृत निवेश बताया गया है। इस परियोजना से ओडिशा को वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में सहयोग पर चर्चा
दोनों नेताओं ने यूएई के नए संप्रभु निवेश कोष लिमाड की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह कोष दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
ब्रिक्स में यूएई की भूमिका की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स में यूएई की सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स में हुए सकारात्मक कामों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए इस मंच पर मिलकर काम जारी रखेंगे। बैठक से भारत और यूएई के बीच शीर्ष नेतृत्व के नियमित संपर्क की परंपरा और दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई।