बिलासपुर। पाणिनीय शोध संस्थान, बिलासपुर द्वारा “पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया का विश्वपरिचय एवं विद्वत्सम्मान” विषय पर आयोजित परिचर्चा लखीराम स्मृति ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुई।मुख्यातिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी उपस्थित रहे। सारस्वत अतिथि के रूप में प्रख्यात साहित्यकार केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व राज्य मंत्री श्री अमर अग्रवाल थे। अध्यक्षता संस्थान की अध्यक्ष प्रो. पुष्पा दीक्षित ने की। इस अवसर पर व्याकरण शास्त्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रो. बृजभूषण ओझा , प्रो.विष्णुकांत पाण्डेय वरिष्ठाचार्य केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर को पण्डितराज’ उपाधि से सम्मानित किया गया। मुख्यातिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ,नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने दोनों आचार्यों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार की ओर से बधाई देते हुये प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक आचार्य वर्तमान में विश्वविद्यालय से जुड़े हैं तथा दूसरे पूर्व में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक रहे हैं, इसलिए पूरा विश्वविद्यालय परिवार इस सम्मान से गौरवान्वित एवं आनन्दित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा एवं पाणिनीय परंपरा को आधुनिक तकनीकी साधनों से जोड़ना समय की आवश्यकता है और डिजिटल युग में संस्कृत को पुनः वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया जा सकता है। कार्यक्रम में छात्रों ने संस्कृत अध्ययन की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रो.पुष्पा दीक्षित ने विषय प्रवर्तन करते हुए पाणिनिप्रक्रिया की वैश्विक प्रासंगिकता पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने बताया कि पाणिनि का व्याकरण आधुनिक भाषाविज्ञान और कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स तक में उपयोगी है। प्रो. ब्रजभूषण ओझा और प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय ने विद्वत्सम्बोधन में पौष्पी पाणिनिप्रक्रिया” विषय पर पाणिनीय व्याकरण की सूक्ष्मताओं और उसके आधुनिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डाला। अंत में सचिव श्री चन्द्रप्रकाश वाजपेयी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय: राजधानी कॉलेज में “नारीवाद- अपनी आवाज़, अपनी पहचान” विषय पर पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज के लाइब्रेरी क्लब ने आईक्यूएसी (आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ) के तत्वावधान में “नारीवाद: अपनी आवाज़, अपनी पहचान” विषय



