संस्कृत भारत की चिरंतन सांस्कृतिक धारा है, जिसमें हमारी प्राचीन परंपराएँ और ज्ञान-संपदा निहित हैं – लोकरंजन

जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जयपुर परिसर में वार्षिकोत्सव एवं छात्रावास दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति आशुतोष कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकारी लोकरंजन सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने की, सह-निदेशक प्रशासन प्रो. शीशराम भी मंचासीन रहे। वैदिक मंगलचरण सरस्वती पूजन से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुया। सह-निदेशक प्रशासन आचार्य शीशराम ने जयपुर परिसर का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अतिथियों ने परिसर की वार्षिक पत्रिका “जयंती” का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. सच्चिदानंद स्नेही ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। अपने उद्बोधन में सारस्वत अतिथि लोकरंजन ने कहा कि संस्कृत भारत की चिरंतन सांस्कृतिक धारा है, जिसमें हमारी प्राचीन परंपराएँ और ज्ञान-संपदा निहित हैं। वहीं न्यायाधिपति आशुतोष कुमार ने कहा कि प्राचीन भारत में संस्कृत लोकभाषा के रूप में प्रचलित थी। उन्होंने संस्कृत मंच से बोलने के अवसर को अपना सौभाग्य बताते हुए परिसर द्वारा दिए गए आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें देश की विविध लोक संस्कृतियों एवं विभिन्न राज्यों की झलकियाँ देखने को मिलीं। संस्कृत गीतों एवं प्रस्तुतियों ने आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया। योग विभाग के छात्रों ने योगासन, पिरामिड एवं विभिन्न शारीरिक कौशलों का प्रभावशाली प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही परिसर की राष्ट्रीय एवं अंतर-परिसरीय उपलब्धियों के लिए भी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्रावास दिवस एवं वार्षिकोत्सव की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन-अधिगम प्रक्रिया में पूर्ण तन्मयता के साथ जुड़ने तथा अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठाचार्य श्रीधर मिश्र ने सभी अतिथियों, आचार्यों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय,प्रो. ईश्वर भट्ट निदेशक, IQAC, प्रो. कृष्णा शर्मा, डॉ. रानी दाधीच, डॉ. कैलाश सैनी, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. नमिता मित्तल, नरेश सिंह डॉ लक्ष्मी शर्मा, डॉ आरती मीना,डॉ अंजू चौधरी,डॉ ललित शर्मा डॉ अंजली गौतम सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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