शारदीय नवरात्रों के पहले दिन रविवार को कालकाजी मंदिर में माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ से आवाजाही बनी रही। श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए दर्शन कर रहे हैं। नवरात्रों के मद्देनजर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। वहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। मंदिर परिसर के चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
श्री कालकाजी मंदिर प्रबंधक सुधार कमिटी के अध्यक्ष लोकेश भारद्वाज ने बताया कि नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 500 सेवादारों को दिन-रात अलग-अलग शिफ्टों में तैनात किया गया है। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ पीएसी और अर्धसैनिक बलों की कंपनियां भी तैनात हैं।
कमिटी के उपाध्यक्ष नीरज भारद्वाज ने बताया कि श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए मंदिर में तीन प्रमुख प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। पहला प्रवेश द्वार राम प्याऊ (शंभूदयाल) की ओर से है, दूसरा प्रवेश मार्ग ओखला की तरफ से बनाया गया है और तीसरा प्रवेश बिंदु लोटस टेंपल की ओर से है। वीआईपी पास धारकों के लिए राम प्याऊ की ओर से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु ओखला और महंत परिसर की ओर से बाहर निकल सकेंगे। इन मार्गों के जरिए भीड़ को व्यवस्थित रखने और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनाए रखने की योजना है।
कमिटी के मैनेजर प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि नवरात्रों के दौरान मंदिर 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। हालांकि, निर्धारित धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान दर्शन कुछ समय के लिए बंद रहेंगे। रात 12 बजे से 12:30 बजे तक माता की सज्जा यानी उन्हें शयन कराने की प्रक्रिया के दौरान मंदिर बंद रहेगा। इसके बाद रात 3 बजे से सुबह 4 बजे तक आरती के लिए दर्शन रोक दिए जाएंगे। दिन में सुबह 11 बजे से आधे घंटे तक भोग के दौरान भी मंदिर में दर्शन नहीं होंगे। श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कैट्स एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।
दंडवत यात्रा पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने कुछ गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है। इसके तहत हाथों में दीया लेकर दंडवत यात्रा करना, डीजे एवं साउंड सिस्टम का उपयोग करना और ध्वज (झंडा) लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कमिटी ने ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की बाधा न आए।

