विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
दिल्ली सरकार ने धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए पुरानी और खंडित मूर्तियों के सम्मानजनक निस्तारण एवं गणेश विसर्जन के लिए विशेष व्यवस्था की है। 110 चिन्हित स्थानों पर पुरानी, खंडित धार्मिक मूर्तियों और पूजा सामग्री के लिए विशेष ‘संग्रह केंद्र’ स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं, गणेश विसर्जन के लिए दिल्ली में 81 चिन्हित स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन तालाब तैयार कर लिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य लोगों को धार्मिक परंपराओं के पालन के लिए व्यवस्थित विकल्प उपलब्ध कराना और इसके साथ सार्वजनिक स्थानों तथा जल निकायों की स्वच्छता बनाए रखना है।
अक्सर पुरानी या खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री को लोग धार्मिक भावनाओं के कारण पेड़ों के नीचे, पार्कों, सड़क किनारे या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रख देते हैं। इससे सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़ी चुनौती सामने आती है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 110 स्थानों की सूची तैयार की है, जहां विशेष ‘संग्रह केंद्र’ स्थापित किए जा रहे हैं। मंदिरों सहित विभिन्न उपयुक्त स्थानों पर बनाए जा रहे इन केंद्रों में श्रद्धालु पुरानी, खंडित मूर्तियों और अन्य धार्मिक सामग्री को सम्मानपूर्वक जमा कर सकेंगे। इससे लोगों को अपने आसपास ही धार्मिक सामग्री के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित विकल्प मिलेगा।
81 स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन तालाब
गणेश उत्सव के दौरान सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन की सुविधा के लिए 81 चिन्हित स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन तालाब तैयार किए गए हैं। सभी 13 राजस्व जिलों में संबंधित विभागों के समन्वय से तैयारियां की गई हैं। विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश, चिकित्सा, आपातकालीन व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और पर्यावरणीय सुरक्षा का ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने श्रद्धालुओं से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित कृत्रिम विसर्जन स्थलों पर ही करने की अपील की है। उन्होंने यमुना या अन्य जल निकायों में प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं करने तथा पूजा सामग्री, फूल-माला और अन्य धार्मिक सामग्री को नदियों या जलाशयों में नहीं डालने का आग्रह किया है।
पीओपी की मूर्तियों से बचने की अपील
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों को प्राथमिकता देने की अपील की है। साथ ही प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी), हानिकारक रसायनों वाले रंगों और ऐसे सजावटी सामान के इस्तेमाल से बचने को कहा है, जो जल और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विसर्जन के बाद प्रतिमाओं के अवशेष और अन्य सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हटाया जाएगा। विसर्जन स्थलों की सफाई की भी व्यवस्था की गई है, ताकि उत्सव के बाद सार्वजनिक स्थान स्वच्छ रहें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। सरकार ऐसी व्यवस्थाएं तैयार कर रही है, जिनसे लोग अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन पूरी श्रद्धा के साथ कर सकें और दिल्ली की स्वच्छता तथा पर्यावरण की रक्षा में भी भागीदार बनें। स्वच्छ और सुंदर दिल्ली केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

